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मुजफ्फरपुर में “डिजिटल अरेस्ट” का खौफनाक खेल, रिटायर्ड दंपती से 18.85 लाख की साइबर ठगी
- Reporter 12
- 17 Apr, 2026
मुजफ्फरपुर में साइबर ठगों ने रिटायर्ड दंपती को 17 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर 18.85 लाख रुपये ठग लिए। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मुजफ्फरपुर/आलम की खबर:बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से साइबर ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने आम लोगों के बीच डर और चिंता दोनों बढ़ा दिए हैं। भगवानपुर इलाके में रहने वाले एक रिटायर्ड कर्मचारी और उनकी पत्नी को साइबर अपराधियों ने सुनियोजित तरीके से अपने जाल में फंसाकर पूरे 17 दिनों तक तथाकथित “डिजिटल अरेस्ट” में रखा और उनसे कुल 18.85 लाख रुपये की ठगी कर ली। यह घटना केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसिक उत्पीड़न और भय के जरिए अपराध को अंजाम देने का एक खतरनाक उदाहरण भी बन गई है, जिसने साइबर अपराध के नए और जटिल तरीकों की ओर इशारा किया है।पूरे घटनाक्रम की शुरुआत एक साधारण से फोन कॉल से हुई, जिसने धीरे-धीरे भयावह रूप ले लिया। रिटायर्ड कर्मचारी को एक व्हाट्सएप कॉल प्राप्त हुआ, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को सुरक्षा एजेंसी का अधिकारी बताते हुए बेहद सख्त लहजे में बातचीत शुरू की और उनके पहचान से जुड़े दस्तावेजों का हवाला देते हुए उन पर गंभीर आरोप लगाए। आरोप यह था कि उनके नाम से जारी सिम कार्ड और बैंक खाते का इस्तेमाल गैरकानूनी गतिविधियों में किया गया है, जिससे दंपती पूरी तरह घबरा गए और मानसिक दबाव में आ गए।
इसके बाद अपराधियों ने लगातार कॉल के जरिए उन्हें अपने नियंत्रण में रखा और ऐसा माहौल बना दिया कि वे किसी अन्य व्यक्ति से खुलकर बात करने की स्थिति में नहीं रहे। धीरे-धीरे यह स्थिति “डिजिटल अरेस्ट” में बदल गई, जहां पीड़ितों को फोन से अलग होने तक की अनुमति नहीं थी और उन्हें हर समय निगरानी में रखा जा रहा था।
17 दिनों तक मानसिक दबाव और निगरानी
साइबर ठगों ने दंपती को इस कदर डरा दिया कि वे सामान्य जीवन भी नहीं जी पा रहे थे। उन्हें दिन-रात फोन पर रहने के लिए मजबूर किया गया और यहां तक कि सोने के लिए भी बहुत कम समय मिल पाता था। अगर कोई रिश्तेदार फोन करता, तो उन्हें सीमित बातचीत करने के निर्देश दिए जाते थे, जिससे किसी को भी वास्तविक स्थिति का अंदाजा न हो सके।
अपराधियों ने वीडियो कॉल के माध्यम से खुद को अधिकारी जैसा दिखाने की कोशिश की और भरोसा तथा डर दोनों बनाए रखा। इस पूरे दौरान दंपती मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुके थे और उन्हें लगातार यह डर सता रहा था कि अगर उन्होंने निर्देशों का पालन नहीं किया, तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
“जांच में सहयोग” के नाम पर पैसे की मांग
धीरे-धीरे अपराधियों ने अपने असली इरादे को अंजाम देना शुरू किया और दंपती को यह विश्वास दिलाया कि उन्हें मामले से बचने के लिए जांच में सहयोग करना होगा। इसी बहाने उनसे एक लिखित आवेदन भी तैयार करवाया गया, जिसमें सहयोग की बात दर्ज कराई गई।
इसके बाद उन्हें बताया गया कि कुछ वित्तीय प्रक्रिया पूरी करनी होगी और इसके लिए निर्धारित खातों में रकम जमा करनी पड़ेगी। भय के कारण दंपती ने बिना किसी जांच-पड़ताल के इन निर्देशों का पालन करना शुरू कर दिया और बैंक जाकर अलग-अलग खातों में पैसे ट्रांसफर करने लगे।
अलग-अलग खातों में भेजे गए लाखों रुपये
घटना के दौरान दंपती से कई चरणों में पैसे ट्रांसफर करवाए गए। पहले एक बड़ी रकम एक कंपनी के खाते में भेजी गई, इसके बाद अन्य राज्यों से जुड़े खातों में भी धनराशि ट्रांसफर करवाई गई। इस पूरी प्रक्रिया में कुल 18.85 लाख रुपये ठगों के पास पहुंच गए।
यहां तक कि जब एक बार पैसे भेज दिए गए, तब भी अपराधियों की मांग खत्म नहीं हुई और वे लगातार और रकम की मांग करते रहे। इसी बिंदु पर पीड़ित को शक हुआ कि वह किसी बड़े साइबर फ्रॉड का शिकार हो चुके हैं।
शक होने पर टूटा ठगी का जाल
जब बार-बार पैसे की मांग जारी रही, तब रिटायर्ड कर्मचारी ने हिम्मत दिखाते हुए कॉल को तोड़ा और अपने परिजनों से संपर्क किया। इसके बाद पूरे मामले की जानकारी सामने आई और साइबर अपराध की शिकायत संबंधित पोर्टल पर दर्ज कराई गई।
घटना का खुलासा होने के बाद परिवार के सदस्यों ने पीड़ित दंपती को संभाला और उन्हें मानसिक रूप से मजबूत किया। इस दौरान यह भी स्पष्ट हुआ कि अपराधियों के पास परिवार से जुड़ी कई जानकारियां पहले से मौजूद थीं, जिसका इस्तेमाल उन्होंने डर पैदा करने के लिए किया।
पुलिस जांच में जुटी, म्यूल अकाउंट का शक
मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बैंक खातों और ट्रांजेक्शन की बारीकी से जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि रकम किन-किन खातों में भेजी गई और उसके पीछे कौन लोग शामिल हैं।
प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि ठगों ने फर्जी कंपनियों और म्यूल अकाउंट के जरिए इस ठगी को अंजाम दिया, जिससे पैसे का पता लगाना मुश्किल हो सके। पुलिस का कहना है कि जल्द ही इस नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा और आरोपियों को गिरफ्तार करने की कार्रवाई की जाएगी।
बढ़ते साइबर अपराध को लेकर चेतावनी
यह घटना एक बार फिर यह संकेत देती है कि साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं और अब वे केवल तकनीकी नहीं बल्कि मनोवैज्ञानिक दबाव का भी इस्तेमाल कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी स्थिति में अनजान कॉल पर विश्वास न करें, खासकर जब कोई खुद को सरकारी अधिकारी बताकर डराने की कोशिश करे। ऐसे मामलों में तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करना ही सबसे सुरक्षित कदम है।
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